गुरुवार, 8 जनवरी 2026

26. चौबीस ठाणा मे कार्मण काययोग

26. चौबीस ठाणा मे कार्मण काययोग*
https://youtu.be/RY2NBtowBkE?si=WzBFuKT9MCy-J5KD
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जब कोई जीव कई से मरण करके विग्रहगति मे जाता है, वह विग्रहगति की अवस्था कार्मण काय योग होता है, तथा इसी अवस्था मे जीव अनहारक रहता है। तथा जब केवलीसमुद्धात के दो प्रतर और एक लोकपुरण ये तीन समय मे भी कार्मण काययोग होता है।

24. स्थान मे कार्मण काययोग :-
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*०१) गति      ०४/०४*   चारो गति
*०२) इन्द्रिय    ०५/०५*   पाँचो इन्द्रिय
*०३) काय      ०६/०६*   छहो काय
*०४) योग   स्वकीय/१५* कार्मण काययोग
*०५) वेद         ०३/०३*  तीनो वेद 
*०६) कषाय     २५/२५*  सभी कषाएँ
*०७) ज्ञान        ०६/०८* 
      (कुअवधिज्ञान और मनःपर्यय ज्ञान के बिना)
*०८) संयम     ०२/०७*  
असंयम विग्रहगति मे यथाख्यात केवली समुद्धात में
*०९) दर्शन      ०४/०४*  चारो दर्शन
*१०) लेश्या     ०६/०६*  सभी लेश्या
*११) भव्यक्त्व   ०२/०२*  भव्य और अभव्य दानो
*१२) सम्यक्त्व   ०५/०६*  
मिश्र सम्यक्त्व मे मरण नही होता इसलिए नही होता तथा क्षायिक केवली समुद्धात अपेक्षा होता है।
*१३) संज्ञी         ०२/०२*  सैनी और असैनी
*१४) आहारक   ०१/०२*  अनहारक
*१५) गुणस्थान   ०४/१४*  ०१, ०२, ०४, १३
*१६) जीवसमास  १९/१९*  सभी
*१७) पर्याप्ति       ००/०६*  कोई भी नही 
*१८) प्राण           ०७/१०*  सात प्राण 
०५ भावेन्द्रिय, ०१ कायबल, ०१ आयु प्राण
*१९) संज्ञा           ०४/०४*  चारो  संज्ञा
आहार संज्ञा, भय संज्ञा, मैथुन संज्ञा, परिग्रह संज्ञा।
*२०) उपयोग      १०/१२*  
कुअवधिज्ञानोपयोग और मनःपर्यय ज्ञानो के बिना
*२१) ध्यान         १०/१६*  
      आर्तध्यान ०४, रौद्रध्यान ०४,  धर्मध्यान ०२
*२२) आस्रव     ४३/५७*  
मिथ्यात्व ०५,अविरति १२,कषाय २५, योग स्वकीय
*२३) जाति   ८४ लाख/८४ लाख* सभी
*२४) कुल       सभी/१९९.५ लाख़ करोड*
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*प्रश्न ९२) -कार्मणकाययोग किसे कहते हैं?*
उत्तर-ज्ञानावरणादिक अष्ट कर्मों के समूह को अथवा  नामकर्म के उदय से होने वाली काय को कार्मण काय कहते हैं और उसके द्वारा होने वाले आत्म प्रदेशों के परिस्पन्दन को कार्मण काययोग कहते हैं।
 *(गो. जी. २४१)*
कार्मण शरीर के निमित्त से जो योग होता है उसे कार्मण काययोग कहते हैं। इसका तात्पर्य यह है कि अन्य औदारिकादि शरीर वर्गणाओं के बिना केवल एक कर्म से उत्पन्न हुए वीर्य के निमित्त से आत्म प्रदेश परिस्पन्दन रूप जो प्रयत्न होता है उसे कार्मण काययोग कहते है।  *(धवला ०९/२९७)*
*(औदारिक आदि वर्गणा यानि औदारिक, वैक्रियक, आहारक वर्गणा के बिना)*

*प्रश्न ९३) क्या कार्मण काययोग मात्र विग्रहगति में ही होता है?*
उत्तर- नहीं, विग्रहगति में तो कार्मण काययोग होता ही होता है लेकिन १३ वें गुणस्थान की समुद्धात अवस्था में भी तीन समय तक बिना विग्रहगति के भी कार्मण काययोग होता है।

*प्रश्न ९४) कार्मण काययोग में कुअवधिज्ञान क्यों नहीं होता?*
उत्तर- कुअवधिज्ञान अनुगामी नहीं होता, जिसको साथ ले जाने से कार्मण काययोग में कुअवधिज्ञान बन जावे और कार्मण काययोग के अल्पकाल में कुअवधिज्ञान उत्पन्न भी नहीं हो सकता इसलिए कार्मण काययोग में कुअवधिज्ञान नहीं होता है।

*प्रश्न ९५) कार्मण काययोग में अवधिज्ञान किस- किस अपेक्षा होता है?*
उत्तर- कार्मण काययोग में अवधिज्ञान की अपेक्षाएँ- *०१)* अनुगामी अवधिज्ञान को लेकर जाने वाले चारों गति के जीवों के
*०२)* सर्वार्थसिद्धि से आने वाले जीवों के 
*०३)* तीर्थंकर प्रकृति की सत्ता वाले देव और नरक गति से आने वाले जीवों के, आदि ।

*प्रश्न ९६) कार्मण काययोग में चक्षुदर्शन किन-किन जीवों के पाया जाता है?*
उत्तर- कार्मण काययोग में स्थित चतुरिन्द्रिय, असंज्ञी पंचेन्द्रिय तथा संज्ञी पंचेन्द्रिय जीवों के चक्षुदर्शन पाया जाता है।
चतुरिन्द्रिय, असंज्ञी पंचेन्द्रिय के ०१, ०२ गुणस्थान 
संज्ञी पंचेन्द्रिय के ०१, ०२, ०४ गुणस्थान होता है।
◆ यहा चक्षुदर्शनावरण कर्म का क्षयोपशम है इसलिए चक्षुदर्शन होता है।
◆ एक, दो, तीन इन्द्रिय जीवो के चक्षु ही नही होती अतः चक्षुदर्शन भी नही होता है।

*प्रश्न ९७) कार्मणकाययोग में कौन सा सम्यग्दर्शन उत्पन्न हो सकता है?*
उत्तर- कार्मण काययोग में कोई भी सम्यग्दर्शन उत्पन्न नहीं हो सकता क्योंकि सम्यग्दर्शन की पूर्व भूमिका में जिस विशुद्धि की आवश्यकता होती है वह विशुद्धि इतने अल्पकाल में नहीं हो पाती है। इसलिए वहाँ कोई भी सम्यग्दर्शन उत्पन्न नहीं हो सकता है।
*नोट* कृतकृत्य वेदक सम्यग्द्रष्टि विग्रहगति में सम्यक प्रकृति का क्षय करके क्षायिक सम्यग्द्रष्टि बन सकता है।

*प्रश्न ९८) कार्मण काययोग मे कम से कम कितने प्राण हो सकते है।*
उत्तर - कार्मण काययोग मे कम से कम दो प्राण कायबल और आयु प्राण होते है। ये प्राण केवली समुद्धात मे जब कार्मण काययोग होता है तब होते है। (प्रतर, लोकपुरण और प्रतर के समय मे)

*प्रश्न ९९) कार्मण काययोग मे कौन सा ध्यान नही हो सकता है?*
उत्तर - कार्मण काययोग मे छ्ह ध्यान नही हो सकते है – विपाक विचय, संस्थान विचय धर्मध्यान तथा चारो शुक्ल ध्यान नही होते है।
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*आगम के परिपेक्ष में (शलभ जैन)*

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